भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को बैंकिंग प्रणाली में नकदी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए छह दिन की वैरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी के जरिए 65,322 करोड़ रुपये की अस्थायी तरलता डाली। यह कदम बैंकों में नकदी की स्थिति को संतुलित बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
क्या है वैरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी
वीआरआर नीलामी आरबीआई (RBI) की एक मौद्रिक नीति प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से केंद्रीय बैंक अल्पकालिक अवधि के लिए बैंकों को नकदी उपलब्ध कराता है।निश्चित रेपो दर से अलग, वीआरआर में ब्याज दर नीलामी प्रक्रिया के जरिए तय होती है, जिसमें बैंक अपनी जरूरत के अनुसार धनराशि के लिए बोली लगाते हैं।
किस दर पर उपलब्ध कराई गई राशि
आरबीआई (RBI) के अनुसार, इस नीलामी में उपलब्ध कराई गई राशि 5.26 प्रतिशत की कट-ऑफ दर और 5.29 प्रतिशत की भारित औसत दर पर दी गई। इससे बैंकों को अल्पकालिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
घोषित राशि से कम रही तरलता
हालांकि केंद्रीय बैंक ने इस नीलामी के लिए 75,000 करोड़ रुपये की राशि घोषित की थी, लेकिन वास्तविक रूप से 65,322 करोड़ रुपये ही बैंकों में डाले गए।
कर भुगतान और जीएसटी निकासी का असर
बैंकों में अधिशेष नकदी में हाल के दिनों में तेज गिरावट देखने को मिली है। इसकी मुख्य वजह अग्रिम कर भुगतान और जीएसटी की निकासी को माना जा रहा है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में उपलब्ध नकदी घट गई।
बैंकिंग सिस्टम में मौजूदा अधिशेष नकदी
अनुमान के मुताबिक 26 मार्च तक बैंकिंग प्रणाली में लगभग 48,698.38 करोड़ रुपये की अधिशेष नकदी मौजूद है। पिछले कुछ दिनों में आरबीआई ने विभिन्न अवधियों की वीआरआर नीलामियों के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में कुल 2,08,208 करोड़ रुपये की अस्थायी नकदी डाली है, ताकि वित्तीय प्रणाली में तरलता बनी रहे।
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