राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें एक्सचेंज ने दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही कंपनियों के डीमैट खातों से रोक हटाने के राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के अधिकार को चुनौती दी थी।
एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC) की धारा 60(5) के तहत एनसीएलटी को दिवाला प्रक्रिया से जुड़े मामलों में डीमैट खातों से रोक हटाने के आवेदन पर विचार करने का अधिकार प्राप्त है।
NCLAT ने कहा — अधिकार क्षेत्र का सही इस्तेमाल
अपील को खारिज करते हुए एनसीएलएटी ने कहा कि एनसीएलटी ने अपने अधिकार क्षेत्र का उचित उपयोग करते हुए ये आदेश पारित किए हैं।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि दिवाला प्रक्रिया से जुड़े मामलों में एनसीएलटी के पास ऐसे विवादों पर निर्णय लेने का अधिकार है और उसके आदेश वैधानिक दायरे में आते हैं।
BSE ने अधिकार क्षेत्र पर उठाया था सवाल
बीएसई ने अपनी अपील में तर्क दिया था कि आईबीसी की धारा 60(5) के तहत एनसीएलटी को उन मामलों में फैसला करने का अधिकार नहीं है जो प्रतिभूति कानूनों और सेबी के परिपत्रों के अंतर्गत आते हैं।
एक्सचेंज का कहना था कि डीमैट खातों को फ्रीज करने का मामला प्रतिभूति बाजार के नियामकीय ढांचे से जुड़ा है, इसलिए इस पर फैसला करने का अधिकार एनसीएलटी के पास नहीं है।
दो कंपनियों से जुड़ा है मामला
यह विवाद दो कंपनियों — फ्यूचर कॉरपोरेट रिसोर्सेज और लिज ट्रेडर्स एंड एजेंट्स — से संबंधित है।
बीएसई ने इन कंपनियों के डीमैट खातों को फ्रीज कर दिया था, क्योंकि उन्होंने वार्षिक लिस्टिंग शुल्क का भुगतान नहीं किया था और लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट (LODR) नियमों का पालन नहीं किया था।
समाधान पेशेवर ने NCLT से की थी अपील
दोनों कंपनियां कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया से गुजर रही थीं। ऐसे में उनके समाधान पेशेवर और परिसमापक ने एनसीएलटी से संपर्क किया, क्योंकि बीएसई ने डीमैट खातों से रोक हटाने से इनकार कर दिया था।
कंपनियां उन खातों में मौजूद शेयरों को बेचकर देनदारियों के निपटान की प्रक्रिया आगे बढ़ाना चाहती थीं।
NCLT ने BSE को दिए थे निर्देश
एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने 31 जुलाई 2024 और 31 अक्टूबर 2025 को दो अलग-अलग आदेशों में बीएसई को डीमैट खातों से रोक हटाने का निर्देश दिया था।
इन आदेशों को बीएसई ने बाद में एनसीएलएटी में चुनौती दी थी, जिसे अब अपीलीय न्यायाधिकरण ने खारिज कर दिया है।