पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते आर्थिक स्थिति में आ रही चुनौतियों का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government ) इस संकट से प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत उपायों पर विचार कर रही है, खासकर सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (MSMEs) के लिए।
पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती
सरकार Modi Government ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का प्रभाव आम नागरिकों पर कम पड़े। वर्तमान में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क तीन रुपये प्रति लीटर और डीजल पर कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया है ताकि घरेलू उपलब्धता को बढ़ाया जा सके।
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। मार्च की शुरुआत में, कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, लेकिन बाद में यह घटकर 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा है।
व्यवसायों और परिवारों को लक्षित राहत
मुख्य आर्थिक सलाहकार, वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि सरकार Modi Government को संकट से प्रभावित व्यवसायों और परिवारों को तुरंत राहत देने के साथ-साथ भविष्य की जरूरतों के लिए संसाधन तैयार करने होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को खर्च की प्राथमिकताएं फिर से तय करनी होंगी और लक्षित राहत प्रदान करने की जरूरत है।
एयरलाइन कंपनियों के लिए राहत के विकल्प
नागर विमानन मंत्रालय एयरलाइन कंपनियों पर पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव को कम करने के लिए कई राहत उपायों पर विचार कर रहा है। इनमें से एक विकल्प राज्य सरकारों के साथ मिलकर विमान ईंधन (ATF) पर कर को कम करने का है।
वर्तमान में, विभिन्न राज्यों में जेट ईंधन पर वैट की दर अलग-अलग है। दिल्ली में जेट ईंधन पर वैट 25 प्रतिशत है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह केवल 1 प्रतिशत है। इस अंतर को समाप्त करने के लिए मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर रहा है।
हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों का असर
पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण हवाई क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर एयरलाइन कंपनियों की परिचालन लागत पर पड़ा है। कुछ एयरलाइन कंपनियां अपनी सेवाओं को कम कर रही हैं, खासकर पश्चिम एशिया के लिए। इस स्थिति में, एयरलाइनों को लंबा मार्ग अपनाने के कारण ईंधन खर्च अधिक हो रहा है, जिससे उनकी परिचालन लागत बढ़ गई है।
अन्य देशों के साथ संपर्क में डीजीसीए
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के प्रमुख, फैज अहमद किदवई ने कहा कि एयरलाइन कंपनियों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति में सुधार हो सकता है। डीजीसीए, अन्य देशों के विमानन प्राधिकरणों के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर बातचीत कर रहा है।
यह सभी कदम सरकार Modi Government द्वारा आर्थिक संकट से निपटने के प्रयासों का हिस्सा हैं, ताकि प्रभावित क्षेत्रों को राहत मिल सके और अर्थव्यवस्था को स्थिर किया जा सके।