बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड Reliance Industries और उसके चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी Mukesh Ambani के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता जितेंद्र मारू की याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
अदालत की पीठ ने सुनाया फैसला
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत के आदेश की विस्तृत प्रति अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है।
क्या था याचिका में आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड Reliance Industries ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी के कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन क्षेत्र से प्राकृतिक गैस का अवैध रूप से दोहन किया।
याचिकाकर्ता ने कंपनी और उसके अधिकारियों के खिलाफ चोरी, बेईमानी, गबन और आपराधिक विश्वासघात जैसे आरोपों में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।
2004 से 2013 के बीच अवैध गैस निकासी का दावा
याचिकाकर्ता जितेंद्र मारू के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज Reliance Industries ने 2004 से 2013 के बीच अपने अनुबंधित गहरे समुद्री कुओं से ड्रिलिंग करते हुए ओएनजीसी के क्षेत्रों के पास स्थित कुओं से प्राकृतिक गैस का अवैध रूप से दोहन किया।
ओएनजीसी ने 2013 में किया था खुलासा
याचिका में दावा किया गया कि ओएनजीसी ने वर्ष 2013 में इस कथित अनधिकृत गैस दोहन का पता लगाया था और इसकी जानकारी भारत सरकार को दी थी।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में परामर्श कंपनी डीगोलियर एंड मैकनॉटन की स्वतंत्र जांच और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए.पी. शाह समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया। इन रिपोर्टों में कथित तौर पर यह निष्कर्ष निकाला गया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ओएनजीसी के गैस भंडार से गैस निकाली थी।
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