Vedanta Group पर Viceroy Research की रिपोर्ट ‘भरोसे लायक नहीं’: पूर्व CJI चंद्रचूड़

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नई दिल्ली: भारतीय उद्योग जगत के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (Former Chief Justice of India – CJI) डी वाई चंद्रचूड़ (D.Y. Chandrachud) ने अमेरिकी शॉर्ट सेलर वायसराय रिसर्च (Viceroy Research) द्वारा वेदांता समूह (Vedanta Group) पर जारी की गई रिपोर्ट को ‘विश्वसनीय नहीं’ बताया है। यह टिप्पणी वेदांता समूह के लिए एक बड़ी राहत है, जो वायसराय रिसर्च द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का सामना कर रहा था। वेदांता समूह ने शुक्रवार को शेयर बाजार (stock market) को बताया कि पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ की यह टिप्पणी वायसराय रिसर्च रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों के संबंध में उनसे स्वतंत्र कानूनी राय (independent legal opinion) मांगने के बाद आई है।

 

वायसराय रिसर्च का ‘भ्रामक रिपोर्ट’ प्रकाशित करने का इतिहास

शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक, पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने वायसराय रिसर्च की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि “वायसराय का सूचीबद्ध कंपनियों में शॉर्ट पोजीशन लेने और फिर अवैध रूप से लाभ कमाने के लिए भ्रामक रिपोर्ट प्रकाशित करने का रिकॉर्ड रहा है।” यह टिप्पणी वायसराय रिसर्च की कार्यप्रणाली पर सीधा हमला है, जो पहले भी कई कंपनियों के खिलाफ ऐसी रिपोर्टें जारी कर चुका है, जिससे उन कंपनियों के शेयर मूल्य (share prices) में गिरावट आई थी।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने विशेष रूप से वेदांता पर वायसराय रिसर्च की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की गंभीरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “रिपोर्ट में ‘पोंजी स्कीम’ (Ponzi scheme) और ‘परजीवी’ (parasite) जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं, जिनसे प्रश्नकर्ता (वेदांता) के व्यवसाय और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।” ये शब्द किसी भी कंपनी के लिए बेहद गंभीर होते हैं और सीधे तौर पर उसकी व्यावसायिक नैतिकता और स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

 

वेदांता समूह कानूनी उपाय अपनाने के लिए तैयार

पूर्व सीजेआई की टिप्पणी के बाद, वेदांता समूह ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इन निराधार आरोपों के खिलाफ कानूनी उपाय अपनाने (pursue legal remedies) के लिए पूरी तरह तैयार है। चंद्रचूड़ ने कहा, “इन परिस्थितियों में, प्रश्नकर्ता कानूनी उपाय अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।” यह दर्शाता है कि वेदांता इन आरोपों को हल्के में नहीं ले रही है और अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी।

अमेरिकी शॉर्ट सेलर वायसराय रिसर्च ने 9 जुलाई की अपनी रिपोर्ट में अरबपति कारोबारी अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) के नेतृत्व वाली ब्रिटिश कंपनी वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resources) को एक “परजीवी” बताया था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि वेदांता रिसोर्सेज अपनी भारतीय इकाई वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) को “व्यवस्थित रूप से खत्म” (systematically stripping) कर रही है। समूह ने इस आरोप को “चुनिंदा गलत सूचना पर आधारित और निराधार” बताया है, जिसका एकमात्र मकसद कंपनी को बदनाम करना है।

 

शॉर्ट सेलर के आरोप और वेदांता का खंडन

वायसराय रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय खनन कंपनी वेदांता लिमिटेड की ब्रिटेन स्थित मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज के कर्ज (debt) के खिलाफ एक शॉर्ट पोजीशन (short position) ली थी। शॉर्ट पोजीशन लेने का मतलब है कि शॉर्ट सेलर को उम्मीद होती है कि कंपनी के शेयर या बॉन्ड (bonds) की कीमत गिरेगी, जिससे उन्हें फायदा होगा।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि वेदांता समूह “भारी कर्ज, लूटी गई संपत्ति और लेखांकन की झूठी बातों की नींव पर बना एक ताश का घर (house of cards) है।” ये आरोप बेहद गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और कंपनी की अस्थिरता की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, वेदांता समूह ने इन सभी आरोपों को “पूरी तरह आधारहीन” बताया है और लगातार इनका खंडन करता रहा है।

 

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शॉर्ट सेलिंग और इसकी कार्यप्रणाली

शॉर्ट सेलिंग एक निवेश रणनीति (investment strategy) है जिसमें निवेशक ऐसी कंपनियों के शेयरों को बेचते हैं जो उनके पास नहीं होते (उन्हें ब्रोकर से उधार लेते हैं), यह उम्मीद करते हुए कि शेयर की कीमत गिरेगी। जब कीमत गिर जाती है, तो वे कम कीमत पर शेयर वापस खरीद लेते हैं और ब्रोकर को वापस कर देते हैं, जिससे उन्हें अंतर का लाभ होता है।

कुछ शॉर्ट सेलर, जैसे वायसराय रिसर्च, अपनी शॉर्ट पोजीशन से लाभ कमाने के लिए कंपनियों के बारे में नकारात्मक शोध रिपोर्टें प्रकाशित करते हैं। इन रिपोर्टों का उद्देश्य निवेशकों के बीच कंपनी के प्रति संदेह पैदा करना और शेयर की कीमतों को नीचे गिराना होता है। हालांकि, कई बार इन रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाते हैं, खासकर जब वे निराधार आरोपों पर आधारित होती हैं।

 

उद्योग और नियामक पर प्रभाव

पूर्व सीजेआई जैसे उच्च पदस्थ व्यक्ति की टिप्पणी का वेदांता और व्यापक शेयर बाजार पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। यह न केवल वेदांता की प्रतिष्ठा को मजबूत करेगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि भारतीय नियामक (regulators) और कानूनी प्रणाली (legal system) ऐसी “भ्रामक रिपोर्टों” को गंभीरता से ले सकती है।

यह घटनाक्रम अन्य कंपनियों के लिए भी एक मिसाल कायम कर सकता है जो शॉर्ट सेलर की रिपोर्टों का सामना करती हैं। यह दिखाता है कि कंपनियां अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से कानूनी सलाह ले सकती हैं और आवश्यक कार्रवाई कर सकती हैं।

 

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