रुपया (Rupee) शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 74 पैसे टूटकर 94.70 के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया संकट का कोई समाधान न निकलने के बीच भारतीय मुद्रा में गिरावट की दिशा में निरंतरता बनी हुई है।
घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट का असर
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर निकासी से रुपया (Rupee) दबाव में है। इस स्थिति के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की स्थिति कमजोर बनी हुई है।
रुपया खुला 94.18 पर, फिर 94.70 तक गिरा
रुपया (Rupee) अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में 94.18 पर खुला, लेकिन दोपहर तक यह फिसलते हुए 94.50 के स्तर को पार कर गया और अंततः 74 पैसे की गिरावट के साथ 94.70 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
शेयर बाजारों में गिरावट
शेयर बाजारों में भी निराशाजनक प्रदर्शन देखने को मिला। सेंसेक्स 1,190.76 अंक यानी 1.58 प्रतिशत गिरकर 74,082.69 अंक पर, जबकि निफ्टी 352.25 अंक यानी 1.51 प्रतिशत गिरकर 22,954.20 अंक पर कारोबार कर रहा था।
एफआईआई की निकासी
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को शुद्ध रूप से 1,805.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो रुपया (Rupee) की कमजोरी का एक और प्रमुख कारण माना जा रहा है।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती
वैश्विक डॉलर की ताकत को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.67 पर था, जिससे भी रुपया (Rupee) दबाव में आया।
तेल कीमतों में हल्की गिरावट
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.53 प्रतिशत की मामली गिरावट के साथ 107.4 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, लेकिन यह कीमतें भी रुपये पर दबाव बनाए रखने वाली थीं। इसमें कोई संदेह नहीं कि रुपये (Rupee) की गिरावट का सिलसिला विभिन्न वैश्विक और घरेलू कारणों से लगातार जारी है, और इसके परिणामस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था में एक नया दबाव महसूस हो रहा है।