घर खरीदारों की सुरक्षा के लिए RERA, IBC काफी: केंद्र सरकार ने किया साफ, नया कानून बनाने की कोई योजना नहीं

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए मौजूदा रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (RERA – Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016) और दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, 2016 (IBC – Insolvency and Bankruptcy Code, 2016) के प्रावधान पर्याप्त हैं। सरकार की फिलहाल किसी नए केंद्रीय कानून (new central law) की कोई योजना नहीं है। आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल (Manohar Lal) ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी, जिससे घर खरीदारों और रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी अनिश्चितताएं कुछ हद तक दूर हो सकती हैं।

RERA अधिनियम: पारदर्शिता और जवाबदेही का आधार

मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि फ्लैट खरीदारों और प्रमोटरों (promoters) के बीच अनुबंध संबंधी शर्तों (contractual terms) को नियंत्रित करने के लिए संसद में 2016 में रेरा अधिनियम पारित किया गया था। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता (transparency) और जवाबदेही (accountability) सुनिश्चित करना है, जिससे घर खरीदारों के हितों की रक्षा की जा सके।

उन्होंने बताया कि अब तक देश भर में करीब 1.5 लाख रियल एस्टेट परियोजनाएं (real estate projects) रेरा अधिनियम के तहत पंजीकृत (registered) हैं। यह संख्या बताती है कि रेरा ने एक व्यापक नियामक ढांचा प्रदान किया है। मंत्री ने यह भी कहा कि रेरा अधिनियम लागू होने से पहले रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए कोई केंद्रीय नियामक ढांचा मौजूद नहीं था, जिसके कारण अक्सर घर खरीदारों को समस्याओं का सामना करना पड़ता था।

रेरा अधिनियम के तहत, सभी अधूरी तथा चालू परियोजनाओं और नई परियोजनाओं का पंजीकरण अनिवार्य है। इसके अलावा, प्रमोटर को हर तिमाही में परियोजना की प्रगति रिपोर्ट (progress report) अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होती है, जिससे खरीदारों को अद्यतन जानकारी मिलती रहे और जवाबदेही बनी रहे।

RERA IBC की भूमिका और अधूरे प्रोजेक्ट्स का समाधान

जहां रेरा रियल एस्टेट सेक्टर को नियमित करता है, वहीं दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (IBC) उन मामलों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जहां परियोजनाएं वित्तीय कठिनाइयों के कारण फंस जाती हैं। मंत्री ने बताया कि 2016 से 2024 तक केवल 517 रियल एस्टेट कंपनियों (real estate companies) में दिवाला प्रक्रिया (insolvency process) शुरू हुई है। यह आंकड़ा, रेरा के तहत पंजीकृत परियोजनाओं की संख्या की तुलना में, दर्शाता है कि दिवाला प्रक्रिया अपेक्षाकृत कम मामलों में ही शुरू हुई है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि रेरा और आईबीसी कानूनों के प्रावधान फिलहाल पर्याप्त हैं, और किसी नए केंद्रीय कानून की आवश्यकता या योजना नहीं है। इसका मतलब है कि सरकार मौजूदा कानूनी ढांचे पर भरोसा कर रही है ताकि घर खरीदारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और रियल एस्टेट सेक्टर में स्थिरता लाई जा सके।

RERA अमिताभ कांत समिति की सिफारिशें और उत्तर प्रदेश सरकार की पहल

मार्च 2023 में, अमिताभ कांत (Amitabh Kant) की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य अधूरी रियल एस्टेट परियोजनाओं की समस्याओं का अध्ययन करना था। अगस्त 2023 में प्रस्तुत समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय अक्षमता (financial incapacity) अधूरी परियोजनाओं की मुख्य वजह है। समिति ने परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता (financial viability) बढ़ाने और उन्हें पूरा करने के लिए कई सुझाव दिए।

इस रिपोर्ट के आधार पर, उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) ने नोएडा (Noida) और ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) की अटकी परियोजनाओं के खरीदारों को राहत देने के लिए एक नीति बनाई है। यह नीति उन घर खरीदारों के लिए एक बड़ी राहत है जो लंबे समय से अपने घरों का इंतज़ार कर रहे हैं। यह राज्य सरकारों के लिए एक उदाहरण भी है कि कैसे वे केंद्र की सिफारिशों के आधार पर अपने यहां फंसे प्रोजेक्ट्स को गति दे सकती हैं।

RERA :घर खरीदारों के लिए वर्तमान सुरक्षा जाल

केंद्र सरकार का यह बयान घर खरीदारों को एक स्पष्ट संदेश देता है कि उनके हितों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा पहले से मौजूद है। रेरा और आईबीसी, दोनों मिलकर, रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और विवाद समाधान के लिए महत्वपूर्ण उपकरण प्रदान करते हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकारें अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों को कितनी प्रभावी ढंग से लागू करती हैं ताकि पूरे देश में अटकी परियोजनाओं का समाधान हो सके।

 

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